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Wrong sitting posture during corona era is responsible for cervical spondylitis sciatica nerve compression knee waist back pain dlpg

नई दिल्‍ली. साल 2020 से आए कोरोना के साइड इफैक्‍ट (Side Effect) पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. दिलचस्‍प बात है कि इस दौरान लोग चाहे कोरोना से संक्रमित हुए हों या न हुए हों लेकिन इसके चलते पड़े प्रभाव की वजह से परेशानियां झेल रहे हैं. कोरोना (Corona) की वजह से जीवन में आए बदलावों के बाद अब जीवनशैली में आया एक बड़ा बदलाव लोगों की दिक्‍कतों का अहम कारण बन गया है और यह है सही तरह से बैठने का तरीका भूल जाना. विशेषज्ञों की मानें तो आज सिर्फ सही पोश्चर (Right Posture) में न बैठने की वजह से लोगों को पीठ (back), कमर (Waist), शरीर (Body), एड़ियां (Heels), सिर और गर्दन में दर्द की समस्या 70-80 प्रतिशत तक बढ़ गयी है.

स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि आज हर दूसरा व्यक्ति इन शारीरिक दर्द की परेशानियों से गुजर रहा है, वहीं थोड़ी सी लापरवाही होने लोगों में स्पॉन्डिलाइटिस, गठिया, सर्वाइकल, साइटिका, स्लिप डिस्‍क (Slip Disc), मोटापा (Obesity), तनाव से मसल्‍स और हड्डियों का संकुचित होना, घुटनों में दर्द और महिलाओं में पीसीयूडी की समस्‍याएं हो रही हैं. खास बात है कि कोरोना काल में बैठने का यह तरीका सिर्फ व्‍यस्‍क और नौकरीपेशा लोगों का ही नहीं बदला है बल्कि स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों, कॉलेज और दफ्तर जाने वाले युवाओं और जवानों का भी बदल गया है. जिसकी वजह से पिछले कुछ समय से गंभीर शारीरिक दर्द के मरीज सामने आ रहे हैं.

बैठने के सही और गलत तरीकों पर न्‍यूज 18 हिंदी ने एसएम योग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट एंड नेचुरोपैथी अस्‍पताल इंडिया के सचिव और शांतिमार्ग द योगा आश्रम अमेरिका के फाउंडर व सीईओ योगगुरु डॉ. बालमुकुंद शास्‍त्री और दिल्‍ली स्थित नोबल फिजियोथेरेपी क्‍लीनिक की डॉ. हिना शर्मा से बात की है. डॉ. शास्‍त्री कहते हैं कि शरीर और मन आपस में गहरे जुड़े हैं, यही वजह है कि शरीर के साथ कुछ गलत होने से मन पर और मन के साथ कुछ गड़बड़ होने का गहरा असर शरीर पर पड़ता है. बैठने की मुद्रा से जहां तनाव बढ़ता है वहीं तनाव से मसल्‍स और हड्डियां संकुचित हो जाते हैं और नसें इनके दबाव में आ जाती हैं. इससे पीठ, कमर, कमर के नीचे, सर्वाइकल, पैर, घुटने, एड़ी में दर्द और हाथ में झनझनाहट के अलावा साइको सॉमेटिक डिसऑर्डर्स जैसी परेशानियां पैदा हो रही हैं.

कोरोना काल में सिर्फ सही तरीके से न बैठ पाने के चलते आज लोग साइटिका, सर्वाइकल, स्‍पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियां झेल रहे हैं.

कोरोना काल में सिर्फ सही तरीके से न बैठ पाने के चलते आज लोग साइटिका, सर्वाइकल, स्‍पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियां झेल रहे हैं.

ये हैं बैठने की गलत मुद्राएं
. गर्दन या सर झुकाकर बैठना. डॉ. शास्‍त्री कहते हैं कि यह बैठने का बेहद गलत तरीका है लेकिन आज सबसे ज्‍यादा लोग बैठने के लिए इसी तरीके को अपना रहे हैं और इसकी वजह है मोबाइल फोन. भले ही व्‍यक्ति ने कमर और पीठ सीधी की हुई है लेकिन वह सीधा बैठकर गर्दन झुकाकर लंबे समय तक फोन चलाता है तो ऐसे में सर्वाइकल की समस्‍या होने की पूरी संभावना है.

. कमर को हंचबैक बनाकर या कूबड़ निकालकर बैठना. डॉ. शास्‍त्री कहते हैं कि बहुत सारे लोग आजकल रीढ़ की हड्डी को पूरा पीछे निकालकर और झुककर बैठे रहते हैं. यह गलत मुद्रा है. जबकि हमारे नीचे का हिस्‍सा पूरा सीधा होना चाहिए, छाती बाहर होनी चाहिए और गर्दन भी सीधी होनी चाहिए. ऐसा करने से सायटिका की समस्‍या होती है.

. कुर्सी पर लेटकर बैठना. कई बार देखा गया है कि आराम के लिए लोग कुर्सी को पीछे की तरफ ज्‍यादा झुका लेते हैं और पीठ को आराम देने के लिए बैठते हैं. इस दौरान वे अपने सिर या गर्दन को उठाकर लगातार लैपटॉप आदि पर काम भी करते हैं. यह और भी ज्‍यादा खतरनाक है. इस मुद्रा में किताब पढ़ना तो ठीक है क्‍योंकि उसके लिए सर नहीं उठाना पड़ता लेकिन अगर टेबल पर रखे लैपटॉप आदि पर काम कर रहे हैं और गर्दन उठा रखी है तो यह काफी नुकसान कर सकता है.

.टेबल पर गर्दन झुकाकर बैठना. कई बार लोग कुर्सी पर सीधे बैठते हैं लेकिन गर्दन को टेबल पर ज्‍यादा झुका लेते हैं तो इससे कमर या रीढ़ की हड्डी में परेशानी बढ़ सकती है साथ ही गर्दन में भी दिक्‍कतें हो सकती हैं.

. बेड पर लेटकर काम करना. डॉ. हिना कहती हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई हो या वर्क फ्रॉम होम, लोगों ने बेड को ही वर्क स्‍टेशन बना लिया है. कभी कभी लोग बेड पर उल्‍टे लेट जाते हैं और फिर काम करते हैं. या फिर बेड पर पैर लटकाकर बैठते हैं तो यह नुकसान पहुंचाता है. कोरोना से पहले और कोरोना बाद के शेड्यूल में काफी बड़ा अंतर आया है, वर्क फ्रॉम होम से पहले लोग एक शेड्यूल फॉलो करते थे. उसमें हर काम का तय रूटीन होने के साथ ही बॉडी मूवमेंट भी काफी ज्‍यादा होता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा. घर से चीजें होने के कारण न केवल लोगों का उठना-बैठना, सोना और खाना अनियमित हो गया है, बल्कि लांग सिटिंग जॉब, घर की कुर्सियों पर लंबे समय तक बैठे रहने, बेड पर बैठकर, लेटकर या उल्‍टा लेटकर काम करने से नर्व कंप्रेशन बढ़ रहा है.

ऐसे कर सकते हैं बचाव
डॉ. हिना कहती हैं कि लोगों को यह ध्‍यान रखने की जरूरत है कि ऑफिस में जब वे काम करते हैं तो वहां कुर्सियां भी कस्‍टमाइज्‍ड होती हैं जिससे पीठ और कमर पर जोर नहीं पड़ता. ऐसे में घर में किसी भी कुर्सी पर लंबे समय तक न बैठें. बीच बीच में ब्रेक लें. हाथ और पैरों को स्‍ट्रेच करें. कोशिश करें कि एक ही मुद्रा में लंबे समय तक न बैठें.

. डॉ. बालमुकुंद कहते हैं कि बहुत जरूरी है कि लोग रोजाना योग और आसन करें. किसी भी मूवमेंट को करने से ऑक्‍सीलेशन और सर्कुलेशन होता है शरीर में, जोड़ लचीले बनते हैं, घुटने एक ही स्थिति में बैठे रहने पर उनके बीच फ्लूड खत्‍म होने लगता है, ये सब समस्‍याएं होती हैं, अगर योग या आसन करते रहेंगे तो इससे शरीर मन और विचार स्‍वस्‍थ रहेंगे. सीधे होकर बैठें. ज्‍यादा गर्दन न झुकाएं. कमर को आराम दें लेकिन ऐसा न हो कि इससे मुद्रा खराब हो जाए. कोई भी आसन करें तो पहले उसके बारे में जानें और सही मुद्राएं अपनाएं.

. डॉ. शास्‍त्री कहते हैं कि बैठने के लिए अगर हम ज्‍यादा सहारा लेते हैं तो यह भी दिक्‍कत देता है. बेड पर कुर्सी पर बैठने के दौरान अगर पीठ को पूरा आराम और सहारा दिया तो इससे प्रेशर नीचे से ऊपर रहेगा. ऐसे में पीछे तकिया लगाएं लेकिन इससे पहले टेलबोन पर भी एक तकिया लगाना होगा और हिप्‍स के सहारे रीढ़ की हड्डी को एस शेप में लाते हुए बैठें. यही बैठने का सही तरीका है.

Tags: Corona Virus, Diseases increased, Online classes, Work From Home, Yoga

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